Bitcoin की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई। उस वक्त दुनिया में आर्थिक संकट अपने चरम पर था। माना जाता है कि Bitcoin की शुरुआत सतोशी नाकामोटो नामक एक छद्म लेखक के एक शोधपत्र से हुई थी। इसमें जो तकनीकी ज्ञान दिया गया था, उसे अगले वर्ष कार्यान्वित किया गया। अचानक ही 2012 में यह काफ़ी चरचा में आया और तब से अब तक सुर्खियों में है। मजे की बात यह है कि यह किसी साफ-सुथरे उत्पाद की श्रेणी में नहीं आता. इसे आभासी मुद्रा ही कहा जाता है। दुनिया में यह कहीं भी कानूनी रूप से मान्य नहीं है। यह अधिकतर निवेशकों के लिए आय पैदा करने वाला कोई काम नहीं है। डॉलर में इसका मूल्य प्रत्येक मिनट बदलता रहता है। हालांकि, यह मुद्रा के लेन-देन का एक आसान तरीका हो सकता है, लेकिन पूरी तरह विश्वसनीय बनने में इसकी राह में अभी कई सारी दिक्कतें हैं। यहां तक कि इसके पैरोकार भी इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं बताते हैं। इसके समर्थकों का मानना है कि यह बहुत हद तक प्रयोग के चरण में ही है और इसे फिलहाल तो उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिए बेहद खतरे का वायरस ही मानना चाहिए। हालांकि, इसे काफ़ी सराहना भी मिल रही है और इसके चाहनेवालों में रिचर्ड ब्रैंसन से लेकर जर्मनी का वित्त विभाग तक शामिल है।


Bitcoin  में प्रभाविता (एफिशिएंसी) का कारक बहुत अधिक है। इसमें मुद्रा दुनिया के किसी भी कोने में तुरंत भेजी और पायी जा सकती है। इसके लिए किसी भी बैंक या बिचौलिये की जरूरत नहीं होती है। इसके काम करने के लिए बहुत अधिक फीस की जरूरत भी नहीं होती और लगभग बहुत कम दाम में इसकी प्रोसेसिंग हो सकती है। इसके साथ ही व्यक्ति की निजता भी सुरक्षित रहती है। लेन-देन (ट्रांजेक्शन) में उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत सूचना का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इस वजह से पहचान की चोरी नहीं किये जाने का पूरा भरोसा रहता है। साथ ही, इस्तेमाल करने वाले अपने लेन-देन का पूरा नियंत्रण कर सकते हैं। सारा लेन-देन पूरी तरह से सार्वजनिक होता है। इस वजह से सारा लेन-देन डाटाबेस में उपलब्ध होता है। इसके इन्हीं गुणों की वजह से निवेशक Bitcoin  से संबंधित निवेशों को समर्थन दे रहे हैं। जर्मनी के वित्त मंत्रलय ने इसे ‘खाते की एक इकाई’ (यूनिट ऑफ एकाउंट) के तौर पर मान्यता भी दे दी है। हालांकि, इसका उलटा असर भी हुआ है। अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ने वर्ष 2013 में सिल्क रोड नाम के ऑनलाइन फोरम को बंद कर दिया है, क्योंकि वहां अवैध वस्तुओं और सेवाओं को बिटक्वाइन से बदला जा रहा था। Bitcoin की चोरी के भी कई मामले हुए हैं। इसे उतना भरोसेमंद भी नहीं माना जा रहा है।

 
Top