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हिन्दी व्याकरण / प्रमुख भारतीय लेखक एवं उनकी पुस्तके / UPTET / CTET / TET


*प्रमुख भारतीय लेखक एवं उनकी पुस्तके*

◆पंचतंत्र ~ *विष्णु शर्मा*

●प्रेमवाटिका ~ *रसखान*

●मृच्छकटिकम् ~ *शूद्रक*

●कामसूत्र् ~ *वात्स्यायन*

●दायभाग ~ *जीमूतवाहन*

●नेचुरल हिस्द्री ~ *प्लिनी*

●दशकुमारचरितम् ~ *दण्डी*

●अवंती सुन्दरी ~ *दण्डी*

●बुध्दचरितम् ~ *अश्वघोष*

●कादम्बरी् ~ *बाणभटृ*

●अमरकोष ~ *अमर सिहं*

●शाहनामा ~  *फिरदौसी*

●साहित्यलहरी ~ *सुरदास*

●सूरसागर ~ *सुरदास*

●हुमायूँनामा ~ *गुलबदन बेगम*

●नीति शतक ~ *भर्तृहरि*

●श्रृंगारशतक ~ *भर्तृहरि*

●वैरण्यशतक ~ *भर्तृहरि*

●हिन्दुइज्म ~ *नीरद चन्द्र चौधरी*

●पैसेज टू इंगलैंड ~ *नीरद चन्द्र चौधरी*

●अॉटोबायोग्राफी अॉफ ऐन अननोन इण्डियन ~ *नीरद चन्द्र चौधरी*

●कल्चर इन द वैनिटी वैग ~ *नीरद चन्द्र चौधरी*

●मुद्राराक्षस ~ *विशाखदत्त*

●अष्टाध्यायी ~ *पाणिनी*

●भगवत् गीता ~ *वेदव्यास*

●महाभारत ~ *वेदव्यास*

●मिताक्षरा ~ *विज्ञानेश्वर*

●राजतरंगिणी ~ *कल्हण*

●अर्थशास्त्र ~ *चाणक्य*

●कुमारसंभवम् ~ *कालिदास*

●रघुवंशम् ~ *कालिदास*

●अभिज्ञान शाकुन्तलम् ~ *कालिदास*

●गीतगोविन्द ~ *जयदेव*

●मालतीमाधव ~ *भवभूति*

●उत्तररामचरित ~ *भवभूति*

●पद्मावत् ~ *मलिक मो. जायसी*

●आईने अकबरी ~ *अबुल फजल*

●अकबरनामा ~ *अबुल फजल*

●बीजक ~ *कबीरदास*

●रमैनी ~ *कबीरदास*

●सबद ~ *कबीरदास*

●किताबुल हिन्द ~ *अलबरूनी*

●कुली ~ *मुल्कराज आनन्द*

●कानफैंशंस अॉफ ए लव ~ *मुल्कराज आनन्द*

●द डेथ अॉफ ए हीरो~ *मुल्कराज आनन्द*

●जजमेंट ~ *कुलदीप नैयर*

●डिस्टेंन्ट नेवर्स~ *कुलदीप नैयर*

●इण्डिया द क्रिटिकल इयर्स~ *कुलदीप नैयर*

●इन जेल ~ *कुलदीप नैयर*

●इण्डिया आफ्टर नेहरू ~ *कुलदीप नैयर*

●बिटवीन द लाइन्स ~ *कुलदीप नैयर*

●चित्रांगदा ~ *रविन्द्र नाथ टैगौर*

●गीतांजली~ *रविन्द्र नाथ टैगौर*

●विसर्जन ~ *रविन्द्र नाथ टैगौर*

●गार्डनर ~ *रविन्द्र नाथ टैगौर*

●हंग्री स्टोन्स ~ *रविन्द्र नाथ टैगौर*

●गोरा ~ *रविन्द्र नाथ टैगौर*

●चाण्डालिका~ *रविन्द्र नाथ टैगौर*

●भारत-भारती ~ *मैथलीशरण गुप्त*

●डेथ अॉफ ए सिटी~ *अमृता प्रीतम*

●कागज ते कैनवास~ *अमृता प्रीतम*

●फोर्टी नाइन डेज~ *अमृता प्रीतम*

●इन्दिरा गाँधी रिटर्नस ~ *खुशवंत सिहं*

●दिल्ली ~ *खुशवंत सिहं*

●द कम्पनी अॉफ वीमैन ~ *खुशवंत सिहं*

●सखाराम बाइण्डर ~ *विजय तेंदुलकर*

●इंडियन फिलॉस्पी ~ *डॉ. एस. राधाकृष्णन*

●इंटरनल इंडिया ~ *इंदिरा गाँधी*

●कामयानी ~ *जयशंकर प्रसाद*

●आँसू ~ *जयशंकर प्रसाद*

●लहर ~ *जयशंकर प्रसाद*

●लाइफ डिवाइन ~ *अरविन्द घोष*

●ऐशेज अॉन गीता ~ *अरविन्द घोष*

●अनामिका ~ *सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'*

●परिमल ~ *सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'*

●यामा ~ *महादेवी वर्मा*

●ए वाइस अॉफ फ्रिडम ~ *नयन तारा सहगल*

●एरिया अॉफ डार्कनेस ~ *वी. एस. नायपॉल*

●अग्निवीणा ~ *काजी नजरुल इस्लाम*

●डिवाइन लाइफ ~ *शिवानंद*

●गोदान ~ *प्रेमचन्द्र*

●गबन ~ *प्रेमचन्द्र*

●कर्मभूमि ~ *प्रेमचन्द्र*

●रंगभूमि ~ *प्रेमचन्द्र*

●अनटोल्ड स्टोरी ~ *बी. एम. कौल*

●कन्फ्रन्डेशन विद पाकिस्तान ~ *बी. एम. कौल*

●कितनी नावों में कितनी बार ~ *अज्ञेय*

●गोल्डेन थेर्सहोल्ड ~ *सरोजिनी नायडू*

●ब्रोकेन विंग्स ~ *सरोजिनी नायडू*

●दादा कामरेड ~ *यशपाल*

●पल्लव ~ *सुमित्रानन्दन पंत्त*

●चिदम्बरा~ *सुमित्रानन्दन पंत्त*

●कुरूक्षेत्र ~ *रामधारी सिहं 'दिनकर'*

●उर्वशी ~ *रामधारी सिहं 'दिनकर'*

●द डार्क रूम ~ *आर. के. नारायण*

●मालगुड़ी डेज ~ *आर. के. नारायण*

●गाइड ~ *आर. के. नारायण*

●माइ डेज ~ *आर. के. नारायण*

●नेचर क्योर ~ *मोरारजी देसाई*

●चन्द्रकान्ता ~ *देवकीनन्दन खत्री*

●देवदास ~ *शरतचन्द्र चटोपाध्याय*

●चरित्रहीन ~ *शरतचन्द्र चटोपाध*

हिन्दी व्याकरण /अलंकार की कविता / UPTET / CTET / TET


अलंकार की कविता

बार-बार एक वर्ण जो आए अनुप्रास  की भाषा ।
और यमक में जोड़ा आकर अलग अर्थ दर्शाता ।।
और श्लेष में एक शब्द के अर्थ अनेको  भाई ।
अतिशयोक्ति में बढ़ा चढ़ाकर छोटी बात बताई ।।
चरण कमल एक रूप मानकर रूपके की परिभाषा ।
सा, सी, से, सम ,सरिस, मान लो उपमा जी की आशा ।।
उत्प्रेक्षा संकेत समझ लो मनु,मानो, जनु जानो।
 दो चीजों में भ्रम पैदा हो भ्रांति मान पहचानो।।

हिन्दी व्याकरण / समास / UPTET / CTET / TET


समास

परिभाषा : 'समास' शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है 'छोटा रूप'। अतः जब दो या दो से अधिक शब्द (पद) अपने बीच की विभक्तियों का लोप कर जो छोटा रूप बनाते है, उसे समास, सामाजिक शब्द या समस्त पद कहते है।
जैस : 'रसोई के लिए घर' शब्दों में से 'के लिए' विभक्त का लोप करने पर नया शब्द बना 'रसोई घर', जो एक सामासिक शब्द है।
किसी समस्त पद या सामासिक शब्द को उसके विभिन्न पदों एवं विभक्ति सहित पृथक् करने की क्रिया को समास का विग्रह कहते है।
जैसे : विद्यालय = विद्या के लिए आलय, माता पिता = माता और पिता

समास के प्रकार :

समास छः प्रकार के होते है-
1. अव्ययीभाव समास
2. तत्पुरुष समास
3. द्वन्द्व समास
4. बहुब्रीहि समास
5. द्विगु समास
6. कर्म धारय समास

1. अव्ययीभाव समास :

(A). पहला पद प्रधान  होता है।
(B). पहला पद या पूरा पद अव्यय होता है। (वे शब्द जो लिंग, वचन, कारक, काल के अनुसार नही बदलते, उन्हें अव्यय कहते हैं)
(C). यदि एक शब्द की पुनरावृत्ति हो और दोनों शब्द मिलकर अव्यय की तरह प्रयुक्त हो, वहाँ भी अव्ययीभाव समास होता है।
(D). संस्कृत के उपसर्ग युक्त पद भी अव्ययीभाव समास होते है।

यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
यथाक्रम = क्रम में अनुसार
यथावसर = अवसर के अनुसार
यथाशीघ्र = जितना शीघ्र हो
यथाविधि = विधि के अनुसार
यथेच्छा = इच्छा के अनुसार
प्रतिदिन = प्रत्येक दिन, दिन-दिन, हर दिन
प्रत्येक = हर एक, एक-एक, प्रति एक
प्रत्यक्ष = अक्षि के आगे
रातों-रात = रात ही रात में
बीचों-बीच = ठीक बिच में

आमरण = मरने तक, मरणपर्यंत
आसमुद्र = समुद्रपर्यन्त

भरपेट = पेट भरकर
अनुकूल = जैसा कूल है वैसा
यावज्जीवन = जीवन पर्यन्त
निर्विवाद = बिना विवाद के
दरअसल = असल में
बाकायदा = कायदे के अनुसार
साफ-साफ = साफ के बाद साफ, बिलकुल साफ
घर-घर = प्रत्येक घर, हर घर, किसी भी घर को न छोड़कर
हाथों-हाथ = एक हाथ से दूसरे हाथ तक, हाथ ही हाथ में
2. तत्पुरुष समास :

(A). तत्पुरुष समास में दूसरा पद (पर पद) प्रधान होता है अर्थात् विभक्ति का लिंग, वचन दूसरे पद के अनुसार होता है।
(B). इसका विग्रह करने पर कर्ता व सम्बोधन की विभक्तियों(ने,हे,ओ,अरे) के अतिरिक्त किसी भी कारक की विभक्त प्रयुक्त होती है तथा विभक्तियों के अनुसार ही इसके उपभेद होते है। जैसे-

(क). कर्म तत्पुरुष (को) :

कृष्णार्पण = कृष्ण को अर्पण
वन-गमन = वन को गमन
प्राप्तोदक = उदक को प्राप्त
नेत्र सुखद = नेत्रों को सुखद
जेब करता = जेब को कतरने वाला

(ख). करण तत्पुरुष (से/के द्वारा) :
ईश्वर-प्रदत्त = ईश्वर से प्रदत्त
तुलसीकृत = तुलसी द्वारा रचित
रत्न जड़ित = रत्नों से जड़ित
हस्त-लिखित = हस्त (हाथ) से लिखित
दयार्द्र = दया से आर्द्र

(ग). सम्प्रदान तत्पुरुष (के लिए) :
हवन-सामग्री = हवन के लिए सामग्री
गुरु-दक्षिणा = गुरु के लिए दक्षिणा
विद्यालय = विद्या के लिए आलय
बलि पशु = बलि के लिए पशु

(घ). अपादान तत्पुरुष (से पृथक्) :
ऋण-मुक्त = ऋण से मुक्त
मार्ग भ्रष्ट = मार्ग से भ्रष्ट
देश-निकला = देश से निकला
पदच्युत = पद से च्युत
धर्म-विमुख = धर्म से विमुख
(च). सम्बन्ध तत्पुरुष (का, के , की) :
मंत्रि-परिषद् = मंत्रियों की परिषद्
प्रेम-सागर = प्रेम का सागर
राजमाता = राजा की माता
अमचूर = आम का चूर्ण
रामचरित = राम का चरित

(छ). अधिकरण तत्पुरुष (में, पे, पर) :
वनवास = वन में वास
ध्यान-मग्न = ध्यान में मग्न
घृतान्न = घी में पका अन्न
जीवदया = जीवों पर दया
घुड़सवार = घोड़े पर सवार
कवि पुंगव = कवियों में श्रेष्ठ

3. द्वन्द्व समास :

(A). द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते है।
(B). दोनों पद प्रायः एक दूसरे के विलोम होते है, सदैव नहीं।
(C). इसका विग्रह करने पर 'और' अथवा 'या' का प्रयोग होता है।

माता-पिता = माता और पिता
पाप-पुण्य = पाप या पुण्य / पाप और पुण्य
दाल-रोटी = दाल और रोटी
अन्न-जल = अन्न और जल
जलवायु = जल और वायु
भला-बुरा = भला या बुरा
अपना-पराया = अपना या पराया
धर्माधर्म = धर्म या अधर्म

शीतोष्ण = शीत या उष्ण

शीतातप = शीत या आतप
कृष्णार्जुन = कृष्ण और अर्जुन
फल-फूल = फल और फूल
रुपया-पैसा = रुपया और पैसा
नील-लोहित = नीला और लोहित (लाल)
सुरासर = सुर या असुर/सुर और असुर
यशापयश = यश या अपयश
शस्त्रास्त्र = शस्त्र और अस्त्र

4. बहुब्रीहि समास :

(A). बहुब्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नही होता।
(B). इसमें प्रयुक्त पदों के सामान्य अर्थ की अपेक्षा अन्य अर्थ की प्रधानता रहती है।
(C). इसका विग्रह करने पर 'वाला, है, जो जिसका, जिसकी, जिसके, वह' आदि आते है।

गजानन = गज का आनन है जिसका वह (गणेश)
चतुर्भुज  = चार भुजाएँ है जिसकी वह (विष्णु)
घनश्याम = घन जैसा श्याम है जो वह (विष्णु)
चन्द्रचूड़ = चन्द्र चूड़ पर है जिसके वह
गिरिधर = गिरि को धारण करने वाला है जो वह
नीललोहित = नीला है लहू जिसका वह
सुग्रीव = सुन्दर है ग्रीवा जिसकी वह
नीलकण्ठ = नीला कण्ठ है जिसका वह
मयूरवाहन = मयूर है वाहन जिसका वह

कमलनयन = कमल के समान नयन है जिसके वह
अष्टाध्यायी = अष्ट अध्यायों की पुस्तक है जो वह

चन्द्रमुखी = चन्द्रमा में समान मुखवाली है जो वह
दिगम्बर = दिशाएँ ही है जिसका अम्बर ऐसा वह
षडानन = षट् (छः) आनन है जिसके वह (कार्तिकेय)
आजानुबाहु = जानुओं (घुटनों) तक बाहुएँ है जिसकी वह
कुशाग्रबुद्धि = कुश के अग्रभाग के समान बुद्धि है जिसकी वह
त्रिनेत्र = तीन नेत्र हैं जिसके वह (शिव)
दशानन = दश आनन हैं जिसके वह (रावण)
पीताम्बर = पीत अम्बर हैं जिसके वह (विष्णु)
मुरारि = मुर का अरि है जो वह
आशुतोष = आशु (शीघ्र) प्रसन्न होता है जो वह
वज्रपाणि = वज्र है पाणि में जिसके वह
मधुसूदन = मधु को मारने वाला है जो वह
महादेव = देवताओं में महान् है जो वह
वाल्मीकि = वाल्मीक से उत्पन्न है जो वह
कनकटा = कटे हुए कान है जिसके वह
जितेन्द्रिय = जीत ली है इन्द्रियाँ जिसने वह
मन्द बुद्धि = मन्द है बुद्धि जिसकी वह

5. द्विगु समास :

(A). द्विगु समास में प्रायः पूर्वपद संख्यावाचक होता है तो कभी-कभी परपद भी संख्यावाचक देखा जा सकता है।

(B). द्विगु समास में प्रयुक्त संख्या किसी समूह का बोध कराती है अन्य अर्थ का नहीं, जैसा की बहुब्रीहि समास में देखा है।

(C). इसका विग्रह करने पर 'समूह' या 'समाहार' शब्द प्रयुक्त होता है।

दोराहा = दो राहो का समाहार
सम्पादक द्वय = दो सम्पादकों का समूह
पक्षद्वय = दो पक्षो का समूह
त्रिभुज = तीन भुजाओं का समाहार
त्रिलोक या त्रिलोकी = तीन लोकों का समाहार
संकलन-त्रय = तीन का समाहार
चौमास/चतुर्मास = चार मासों का समाहार
चतुर्भुज = चार भुजाओं का समाहार (रेखीय आकृति)
पंचामृत = पाँच अमृतों का समाहार
पंचवटी = पाँच वटों का समाहार
सप्ताह = सप्त अहों (सात दिनों) का समाहार
सप्तशती = सप्त शतकों का समाहार
अष्ट-सिद्धि = आठ सिद्धियों का समाहार

नवरात्र = नौ रात्रियों क समाहार
शतक = सौ का समाहार

शताब्दी = शत (सौ) अब्दों (वर्षों) का समाहार
त्रिरत्न = तीन रत्नों का समूह

भुवन-त्रय = तीन भुवनो का समाहार
चतुर्वर्ण = चार वर्णों क समाहार
पंचपात्र = पाँच पात्रों का समाहार
षट्भुज = षट् (छः) भुजाओं का समाहार
सतसई = सात सौ का समाहार
सप्तर्षि = सात ऋषियों का समूह
नवरत्न = नौ रत्नों का समूह
दशक = दश का समाहार

6. कर्मधारय समास :

(A). कर्मधारय समास में एक पद विशेषण होता है तो दूसरा विशेष्य।
(B). इसमें कहीं कहीं उपमेय उपमान का सम्बन्ध होता है तथा विग्रह करने पर 'रूपी' शब्द प्रयुक्त होता है।

पुरुषोत्तम = पुरुष जो उत्तम
महापुरुष = महान् है जो पुरुष
पीताम्बर = पीत है जो अम्बर
नराधम = अधम है जो नर
रक्ताम्बर = रक्त के रंग का (लाल) जो अम्बर
कुपुत्र = कुत्सित जो पुत्र
चरम-सीमा = चरम है जो सीमा
कृष्ण-पक्ष = कृष्ण (काला) है जो पक्ष
शुभागमन = शुभ है जो आगमन
मृग नयन = मृग के समान नयन
राजर्षि = जो राजा भी है और ऋषि भी
मुख-चन्द्र = मुख रूपी चन्द्रमा
भव-सागर = भव रूपी सागर
क्रोधाग्नि = क्रोध रूपी अग्नि
विद्या-धन = विद्यारूपी धन
सदाशय = सत् है जिसका आशय
कदाचार = कुत्सित है जो आचार
सत्परामर्श = सत् है जो परामर्श
न्यूनार्थक = न्यून है जिसका अर्थ
नीलकमल = नीला जो कमल
घन-श्याम = घन जैसा श्याम
महर्षि = महान् है जो ऋषि
अधमरा = आधा है जो मरा
कुमति = कुत्सित जो मति
दुष्कर्म = दूषित है जो कर्म
लाल-मिर्च = लाल है जो मिर्च
मंद-बुद्धि = मंद है जो बुद्धि
नीलोत्पल = नीला है जो उत्पल
चन्द्र मुख = चन्द्र जैसा मुख
नरसिंह = जो नर भी है और सिंह भी
वचनामृत = वचनरूपी अमृत
चरण-कमल = चरण रूपी कमल
चरणारविन्द = चरण रूपी अरविन्द
सन्मार्ग = सत् है जो मार्ग
नवयुवक = नव है जो युवक
बहुमूल्य = बहुत है जिसका मूल्य
अल्पेच्छ = अल्प है जिसकी इच्छा
शिष्टाचार = शिष्ट है जो आचार

हिन्दी व्याकरण / हिन्दी सार / UPTET / CTET / TET


👉 संज्ञा के भेद – 5
👉 रचना के आधार पर संज्ञा के भेद – 3
👉 संधि के भेद – 3
👉 स्वर संधि के भेद – 5
👉 समास के भेद – 6
👉 तत्पुरुष समास के भेद – 6
👉 कारक के प्रकार – 8
👉 वचन कितने प्रकार के है – 2
👉 लिंग के प्रकार – 2
👉 काल के भेद – 3
👉 विशेषण के भेद – 4
👉 सर्वनाम के भेद – 6
👉 क्रिया विशेषण के भेद – 4
👉 क्रिया के प्रकार – 2
👉 छंद के प्रकार – 2
👉 अलंकार के प्रकार – 3
👉 रस कितने प्रकार के होते है – 9
👉 शब्द शक्ति के प्रकार – 3
👉 वाक्य के घटक होते है – 2
👉 वर्णों की संख्या – 52
👉 व्यंजन वर्णों की संख्या – 33
👉 संचारीभाव की संख्या – 33
👉 सात्विक भाव की संख्या – 8
👉 विभाव के भेद – 2
👉 काव्य के भेद – 2
👉 वेद कितने है – 4
👉 वेदांग कितने है – 6
👉 पुराण कितने है – 18
👉 बौद्धों के धर्म-ग्रन्थ – 3
👉 संगीत-स्वर के भेद – 3
👉 नायिका के भेद – 3
👉 नायक के भेद – 4
👉 श्रृंगार के भेद – 2
👉 हास्य के भेद – 6
👉 वीर-रस के भेद – 3
👉 काव्य के गुण – 3
👉 विद्याएँ -18
👉 विवाह प्रकार – 8
👉 माताएँ – 7
👉 रत्न के प्रकार – 9
👉 राशियाँ – 12
👉 दिन-रात के पहर – 8
👉 वायु के प्रकार – 5
👉 अग्नियाँ – 3
👉 गुण के प्रकार – 3
👉 शारीरिक दोष – 3
👉 लोक – 3
👉 ऋण के प्रकार – 3
👉 ताप – 3
👉 युग – 4
👉 पुरुषार्थ – 4
👉 वर्ण – 4
👉 दंड के प्रकार – 4
👉 शत्रु – 6
👉 संहिताएँ – 4
👉 भारतीय व्यक्ति-जीवन के संस्कार – 16
👉 ईश्वर के रूप – 2(सगुण, निर्गुण)
👉 भाषा के प्रकार – 2
👉 मूल स्वर के भेद – 3
👉 व्यंजनों के प्रकार – 3
👉 स्पर्श व्यंजन होते है – 25
👉 उष्म व्यंजन होते है – 4
👉 संयुक्त व्यंजन – 4
👉 वर्णों की मात्राएँ होती है – 10
👉 कंठ्य वर्णों की संख्या – 9
👉 तालव्य वर्णों की संख्या – 9
👉 प्रयोग की दृष्टि से शब्द-भेद – 2
👉 विकारी शब्द के प्रकार – 4
👉 अविकारी शब्द के प्रकार – 4
👉 उत्पति की दृष्टि से शब्द-भेद – 4
👉 व्युत्पत्ति या रचना की दृष्टि से शब्द भेद – 3
👉 वाक्य के भेद- अर्थ के आधार पर – 8
👉 वाक्य के भेद- रचना के आधार पर – 3
👉 विधेय के भाग – 6
👉 सर्वनाम की संख्या – 11
👉 प्रत्यय के भेद – 2
👉 रस के अंग – 4?
👉 अनुभाव के भेद – 4
👉 स्थायी भाव के प्रकार – 9
👉 श्रृंगार रस के प्रकार – 2
👉 संज्ञा के भेद – 5
👉 रचना के आधार पर संज्ञा के भेद – 3
👉 संधि के भेद – 3
👉 स्वर संधि के भेद – 5
👉 समास के भेद – 6
👉 तत्पुरुष समास के भेद – 6
👉 कारक के प्रकार – 8
👉 वचन कितने प्रकार के है – 2
👉 लिंग के प्रकार – 2
👉 काल के भेद – 3
👉 विशेषण के भेद – 4
👉 सर्वनाम के भेद – 6
👉 क्रिया विशेषण के भेद – 4
👉 क्रिया के प्रकार – 2
👉 छंद के प्रकार – 2
👉 अलंकार के प्रकार – 3
👉 रस कितने प्रकार के होते है – 9
👉 शब्द शक्ति के प्रकार – 3
👉 वाक्य के घटक होते है – 2
👉 वर्णों की संख्या – 52
👉 व्यंजन वर्णों की संख्या – 33
👉 संचारीभाव की संख्या – 33
👉 सात्विक भाव की संख्या – 8
👉 विभाव के भेद – 2
👉 काव्य के भेद – 2
👉 वेद कितने है – 4
👉 वेदांग कितने है – 6
👉 पुराण कितने है – 18
👉 बौद्धों के धर्म-ग्रन्थ – 3
👉 संगीत-स्वर के भेद – 3
👉 नायिका के भेद – 3
👉 नायक के भेद – 4
👉 श्रृंगार के भेद – 2
👉 हास्य के भेद – 6
👉 वीर-रस के भेद – 3
👉 काव्य के गुण – 3
👉 विद्याएँ -18
👉 विवाह प्रकार – 8
👉 माताएँ – 7
👉 रत्न के प्रकार – 9
👉 राशियाँ – 12
👉 दिन-रात के पहर – 8
👉 वायु के प्रकार – 5
👉 अग्नियाँ – 3
👉 गुण के प्रकार – 3
👉 शारीरिक दोष – 3
👉 लोक – 3
👉 ऋण के प्रकार – 3
👉 ताप – 3
👉 युग – 4
👉 पुरुषार्थ – 4
👉 वर्ण – 4
👉 दंड के प्रकार – 4
👉 शत्रु – 6
👉 संहिताएँ – 4
👉 भारतीय व्यक्ति-जीवन के संस्कार – 16
👉 ईश्वर के रूप – 2(सगुण, निर्गुण)
👉 भाषा के प्रकार – 2
👉 मूल स्वर के भेद – 3
👉 व्यंजनों के प्रकार – 3
👉 स्पर्श व्यंजन होते है – 25
👉 उष्म व्यंजन होते है – 4
👉 संयुक्त व्यंजन – 4
👉 वर्णों की मात्राएँ होती है – 10
👉 कंठ्य वर्णों की संख्या – 9
👉 तालव्य वर्णों की संख्या – 9
👉 प्रयोग की दृष्टि से शब्द-भेद – 2
👉 विकारी शब्द के प्रकार – 4
👉 अविकारी शब्द के प्रकार – 4
👉 उत्पति की दृष्टि से शब्द-भेद – 4
👉 व्युत्पत्ति या रचना की दृष्टि से शब्द भेद – 3
👉 वाक्य के भेद- अर्थ के आधार पर – 8
👉 वाक्य के भेद- रचना के आधार पर – 3
👉 विधेय के भाग – 6
👉 सर्वनाम की संख्या – 11
👉 प्रत्यय के भेद – 2
👉 रस के अंग – 4?
👉 अनुभाव के भेद – 4
👉 स्थायी भाव के प्रकार – 9
👉 श्रृंगार रस के प्रकार – 2
👉 नाटक में रस – 8

हिन्दी व्याकरण / शब्द विचार / UPTET / CTET / TET

शब्द विचार
शब्द -दो या दो से अधिक वर्णो के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं।
जैसे -कमल, नयन, भवन।

पद-जिन शब्दों के द्वारा सार्थक वाक्य की रचना होती है। उन्हें पद कहते हैं।

शब्दों के भेद -शब्द के दो भेद होते है।
1-सार्थकः-जिनका कुछ अर्थ निकले उन्हें सार्थक कहते हैं।
कमल, इन्दु।

2-निरर्थकः-जिनका कुछ अर्थ नहीं निकालता उन्हें निरर्थक कहते हैं।

शब्दों का वर्गीकरण -इसका वर्गीकरण चार आधारो पर किया जा सकता है।

1-उत्पत्ति के आधार पर -शब्द के चार भेद होते है।

1-तत्सम 2-तदभव 3-देशज शब्द 4-विदेशी शब्द

1-तत्सम=उसके सामान अर्थात् जो संस्कृत के समान प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण =नृत्य, रात्रि, मौलिक, मातुल, पुष्प, अग्नि, स्वर्ण, आमृ, कुम्भकार, कपोत, गोधूम, जिह्वा, आलस्य, उष्ट्र, घृत, धैर्य, बिन्दु,दुग्ध,अक्षि,,अश्रु, तृण, मंडूक, कपाट, उत्साह, अमूल्य,ग्राहक, श्रावण, हस्ती, स्मरण, श्वसुर, हर्ष, कच्चपूरिका, कज्जल, गोपाल, हरिद्रा(हल्दी),हस्त।

2-तदभव=उससे उत्पन्न, अर्थात जो संस्कृत से उत्पन्न होते हैं।

3-देशज शब्द =जो शब्द क्षेत्रीय या स्थानीय बोलियो के कारण हिन्दी भाषा में प्रयोग किया जाता है। अथवा जिनका हमें ज्ञान नहीं होता है कि वे किस भाषा से लिये गये हैं।
उदाहरण =खिङकी,बङबङाना ,पगडी
लोटा, डिब्बा, लकङी, छटपटाना आदि।

4-विदेशी शब्द =जो शब्द विदेशी भाषाओं से ज्यो के त्यो अथवा परिवर्तित रूप में हिन्दी में प्रयोग होते हैं,उसे विदेशी शब्द कहते हैं
उदाहरण =स्टेशन,रेफ्रिजरेटर, डाँक्टर, आपरेशन, टेलीफोन, पॉलिसी, जलेबी।

इसके अतिरिक्त कुछ और महत्वपूर्ण शब्द है -

1-अरबी=अदालत,वकील,औरत,
तारीख, मुकदमा, सुबह, हाँल, इलाज, इस्तफाक, हलवाई, जहाज, क़ब्र।-

फारसी=आदमी,उम्मीदवार,सरकार,शहद,गुलाब,चश्मा,दुकान,मोजा,आवास,मुफ्त,जलेबी,कैँची।

पुर्तगालीशब्द = बाँल्टी, आलपिन, गमला, तम्बाकू, साबुन, तौलिया।

चीनी शब्द =चाय,  तूफान, पटाखा,आदि।

तुर्की शब्द =चाकू, बन्दूक, कैंची।

जापानी शब्द =झम्पान,रिक्सा,   सायोनारा।

अंग्रेजी शब्द =कोर्ट, फीस, अपील, पुलिस, टैक्स, आफिसर, वोट, स्कूल, पैन, पेपर, डाक्टर, नर्स आदि।

डच भाषा =तुरुप, बम।

रूसी भाषा =जार, स्पुतनिक,लूना(चन्द्रमा)आदि।

रचना या बनावट के आधार पर शब्द भेद-

इसके आधार पर शब्द के तीन भेद होते हैं -

1-रुढ़ शब्द  2-यौगिक शब्द
3-योगरूढ़ शब्द

1:रूढ़ शब्द - वे शब्द होते हैं, जो किसी विशेष अर्थ में प्रयोग होते हैं, लेकिन उनके खंडो का कोई अर्थ नहीं होता, वह रूढ़ शब्द कहलाते है।
उदाहरण -सीता, रात, हाथ, कान, आम आदि।

2:यौगिक शब्द - जो शब्द दो या दो के मेल से बनते हैं, तथा उनके सार्थक खण्ड हो सकते हैं। उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं।
उदाहरण = दिनेश, सामाजिक, राजपुत्र,विद्यालय,पुस्तकालय,
क्षात्रावास।

3:योगरूढ़ शब्द - जो शब्द दो या दो के मेल से बनते हैं,लेकिन सामान्य अर्थ को प्रकट न करके किसी विशेष अर्थ को प्रकट करते हैं,उन्हे योगरूढ़ शब्द कहते हैं।
उदाहरण -चतुरानन, नीलकंठ,चक्रपाणि,पीताम्बर,
पंकज, जलज, लम्बोदर, दशानन, दशरथ, हनुमान, चारपाई,लालफीतासाही।

3-अर्थ के आधार पर शब्द भेद -

1-एकार्थी 2-अनेकार्थी
 3-पर्यायवाची  4-विलोम
5-भिन्नार्थक 6- वाक्यांश

इसके आधार पर शब्द के तीन भेद होते है -
1: अभिधा 2: लक्षणा 3: व्यंजना

1:-अभिधा = जिनका अर्थ अत्यन्त सरलता से समझ में आ जाता है। उसे अभिधा कहते हैं।
उदाहरण - घर, नगर, सङक,ऊट,हाथी।

2:- लक्षणा - जब शब्द के मुख्य अर्थ से काम नहीं चलता, उस शब्द के लक्षण के आधार पर दूसरा अर्थ निकाल लिया जाता है। उसे लक्षणा शब्द -शान्ति कहते हैं।
उदाहरण -किसी मोटे व्यक्ति को हाथी तथा किसी लम्बे व्यक्ति को ऊँट कहा जाए, गधा आदि।

3:-व्यंजना- जिसके द्वारा अन्य अर्थ का बोध होता है, उसे व्यंजना शब्द कहते हैं।
उदाहरण- शाम हो गई।  कमरा बन्द करो।  दीपक जलाओ। राँत कितनी अँन्धेरी हैं। चोरी के लायक।

एकार्थी - जिनका  केवल एक ही अर्थ हो- गंगा, पटना, राधा।
अनेकार्थी  - हार,  पराजय, गले का हार, कनक-धतूरा, सोना
पर्यायवाची /समानार्थी
विलोम
भिन्नार्थी- अन्न- अन्न, अन्य -दूसरा, अशं-भाग, अंश-कंधा,

प्रयोग के आधार पर - इसके आधार पर शब्द के दो भेद होते हैं।
1:-विकारी शब्द
2:-अविकारी शब्द

1- विकारी = लिंग, वचन, और कारक के कारण जिन शब्दों में विकार अर्थात् परिवर्तन आ जाता है, उसे विकासी शब्द कहते हैं।
उदाहरण - लङका(संज्ञा), मै(सर्वनाम), सुन्दर (विशेषता), आना(क्रिया),तुम(संज्ञा),हम(सर्वनाम) आदि।

2- अविकारी - जिन शब्दों के रूपो में लिंग, वचन, और कारक के अनुसार कोई परिवर्तन नहीं होता उन्हें अविकारी शब्द कहते हैं।
उदाहरण - धीर (क्रिया विशेषण), धीरे, इधर-उधर, और (समुच्चय बोधक और, या, परतें, तो, क्योंकि) अरे!, आदि। (विस्मयादि बोधक)
विकारी शब्द के चार भेद होते हैं -
1-क्रिया विशेषण
2-सम्बंध बोधक
3-समुच्चय बोधक
4-विस्मयादि बोधक

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हिन्दी व्याकरण / वर्णो का उच्चारण स्थान / UPTET / CTET / TET


वर्णो का उच्चारण स्थान


1- अकुह कठंः= (अ, आ, क, ख, ग, घ, ङ, ह, अः) 

2- इचुयशानाम् तालुः= (इ, ई, च, छ, ज, झ ,ञ,य,श)

3- ऋतु रषाणाम् मूर्धा: = (ऋ, ट, ठ, ड, ढ, ण, र, ष) 

4- लृतु लसानाम दन्ताः- (लृ, त, थ, द, ध, न, ल, स) 

5- उपु ओष्णै= (उ, ऊ, प, फ, ब, भ, म) 

6- अमङणन नाम नासिका- (अ, म, ङ, ण, न) 

7- ए दै तो कठंतालु- (ए, ऐ) 

8- ओ दौ तो कण्ठोष्ठम्- (ओ, औ) 

9- वकारस्य दन्तोष्णम्- (व)


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हिन्दी व्याकरण / वर्ण विचार / UPTET / CTET / TET


वर्ण - भाषा की छोटी से छोटी ध्वनि को प्रकट करने वाले चिह्न वर्ण कहलाते है।  जैसे - अ , आ , इ , क आदि। 

वर्णमाला - भाषा के सभी वर्णो के  समूह को वर्णमाला कहते है।
स्वर -
अ,आ,इ,ई,उ,ऊ,ऋ,ए,ऐ,ओ,औ,अं,अः - 11 स्वर
(अं , अः अनुस्वार विसर्ग )। 

स्पर्श व्यंजन : क वर्ग,  च वर्ग,  ट वर्ग,  त वर्ग,  प वर्ग - 25
अन्त:स्थ व्यंजन : य, र, ल, व
उष्म व्यंजन : श, ष, स, ह

संयुक्त व्यंजन - क्ष( क् ,ष) , त्र ( त्, र) , ज्ञ (ज्, ञ) , श्र (श्, र) 

उत्क्षिप्त व्यजंन- ड़ , ढ़ 

स्वर-11  कुल स्वर-13
व्यजंन-33 कुल व्यजंन-39

मुख्य बिन्दु - हिन्दी वर्णमाला मे 44 वर्ण होते  हैं। 
                 हिन्दी वर्णमाला मे कुल 52 वर्ण होते हैं। 
                 स्वर 11 होते हैं। कुल स्वर 13 होते है। 
                 व्यजंन 33 होते है। कुल व्यंजन 39 होते है।

       वर्णो के भेद- तीन होते है।
1-स्वर  2- व्यंजन 3- अयोगवाह

स्वर : जिनका उच्चारण स्वतंत्र रुप से होता है, हिन्दी वर्णमाला में  11 स्वर होते है।
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ,

स्वर के भेद :-
स्वर के दो भेद होते हैं।
हस्व स्वर : जिन स्वरो के उच्चारण में बहुत कम समय लगता है, उन्हें हस्व स्वर कहते है।  ये चार हैं - अ, इ, उ, ऋ

दीर्घ स्वर:- जिन स्वरो के उच्चारण के ह्रस्व स्वर से लगभग दुगना समय लगता है। उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं।
ये सात हैं -आ, ई,ऊ,ए,ऐ,ओ,औ।

व्यंजन =जिनका उच्चारण स्वर की सहायता से होता है। उन्हें व्यंजन कहते हैं। ये संख्या में 33 होते है।
उदाहरण =क वर्ग, च वर्ग, ट वर्ग ,त वर्ग ,प वर्ग -25
  अन्तस्थ - य, र, ल, व
  ऊष्म- श, ष, स, ह।
उत्क्षिप्त व्यजंन- ङ, ढ।

व्यंजन के भेद:-
1-स्पर्श के आधार पर
2-स्वर की    मात्रा के आधार पर।

स्पर्श के आधार पर
1-स्पर्श व्यजंन- जिन व्यजंनो के उच्चारण में वायु फेफङो से निकलकर कंण, तालु, मूर्धा, आदि भागो को स्पर्श करती हुयी बाहर निकलती हैं। उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं। ये संख्या में 25 होते हैं।
उदाहरण =क से प वर्ग।

2-अन्तस्थ व्यजंन=जिन व्यंजनो के उच्चारण में जीभ मुंह के विभिन्न भागों को पूरी तरह स्पर्श नही करती हैं, उन्हें अन्तस्थ व्यजंन कहते हैं। इन्हें अर्थ स्वर भी कहते हैं।
उदाहरण -य, र, ल, व ।

3-ऊष्म व्यजंन=जिन व्यजंनो के उच्चारण मे वायु मुख मे रगङ खाकर ऊष्मा पैदा करती हैं। उन्हें ऊष्म व्यंजन कहते हैं। इन्हें संघर्षी व्यजंन भी कहते हैं।
उदाहरण -श, ष, स, ह।

इसके अतिरिक्त कुछ और भी व्यजंन होते हैं।

1-संयुक्त व्यजंन =दो या दो से अधिक स्वर रहित व्यजंनो को आपस में मिलाकर बोला जाता है। लिखा जाता है, उन्हें संयुक्त व्यंजन कहते हैं।
जैसे =क्ष(क्,ष),त्र(त्,र),ज्ञ(ज्,ञ),श्र(श्,र)

2-उत्क्षिप्त व्यंजन =जिनके उच्चारण मे जीभ ऊपर उठाकर झटके से नीचे गिरती हैं, उन्हें उत्क्षिप्त व्यंजन कहते हैं।
उदाहरण =ङ, ढ। इन्हें व्दिगुण व्यजंन भी कहते है।

स्वर की मात्रा के आधार पर-व्यंजन के दो भेद होते है।

1-अल्प़़प्राण व्यंजन =जिन व्यंजनो के उच्चारण में श्वास की मात्रा कम होती हैं। उन्हें अल्पप्राण व्यंजन कहते हैं। प्रत्येक वर्ग का प्रथम, तृतीय और पंचम वर्ण अल्पप्राण व्यजंन होता है।
उदाहरण =क वर्ग -क, ग,ङ
               च वर्ग -च, ज, ञ
               ट वर्ग-ट, ड, ण
               त वर्ग -त, द, न
               प वर्ग-प, ब, म
इसके अतिरिक्त अन्तस्थ -य, र, ल, व भी अल्पप्राण हैं।

2-महाप्राण व्यजंन =जिन व्यंजको के उच्चारण मे श्वास की मात्रा अधिक होती है। उन्हें महाप्राण व्यजंन कहते हैं। प्रत्येक वर्ग का दुसरा, चौथा,तथा ह महाप्राण व्यजंन होता है।
उदाहरण -क वर्ग -ख, घ
             च वर्ग -छ, झ
             ट वर्ग  - ठ, ढ
             त वर्ग- भ, ध
             प वर्ग - फ, भ
इसके अतिरिक्त ऊष्म-श, ष, स, ह भी महाप्राण व्यजंन है।

अघोष ध्वनि - जिनके उच्चारण में स्वर -तंत्रियो मे कम्पन नहीं होता उन्हें अघोष ध्वनि कहते है। प्रत्येक वर्ग का प्रथम, द्वितीय तथा तीनों स।

सघोष ध्वनि =जिनके उच्चारण में स्वर तंत्रियो में कम्पन होता है। उन्हें सघोष ध्वनि कहते हैं। प्रत्येक का तीसरा, चौथा अ से औ तथा बचे हुये वर्ग के अक्षर और य, र, ल, व,ह।

3-अयोगवाह= हिन्दी वर्णमाला में 11 स्वर और 33व्यंजनो  के अतिरिक्त दो वर्ण और भी होते हैं।अं, अः
अर्थात -जो वर्ण न तो स्वर है न ही व्यंजन, उन्हें अयोगवाह कहते है।
अयोगवाह तीन प्रकार के होते हैं -अं, अः और विसर्ग।

1-अनुस्वार=अनुस्वार में वायु केवल नाक से ही बाहर निकलती हैं। इसे लिखते समय वर्ण के ऊपर बिन्दु लगाते है। जैसे-शंकर, अंबर आदि।

2-अनुनासिक=अनुनासिक मे वायु नाक और मुँह दोनों से बाहर आती हैं। जैसे-आँख, चाँद आदि।

3-विसर्गः-इसका उच्चारण ह के सामान होता है।
उदाहरण =प्रातः, विशेषतः आदि।

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Ek Baar Dubara ! I Don't Know

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